
बलियाः अजग गजब मामलों के लिए चर्चित बलिया का शिक्षा विभाग एकबार फिर चर्चा में है। मामला सीयर शिक्षा क्षेत्र के पतनारी गांव का है। तत्कालीन बीएसए शिवनारायण सिंह के निर्देश पर 29 जून को सीयर एसडीआई ने कंपोजिट प्राथमिक स्कूल नं. वन पर अस्थायी तौर पर तैनात कथित प्रधानाध्यापिका लक्ष्मी देवी को अपने मूल तैनाती स्थल प्राथमिक विद्यालय अखोप में कार्यभार ग्रहण करने आदेश जारी कर दिया। जिसके बाद से ही यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रधानाध्यापिका की तैनाती अखोप में और सेवा दे रही पतनारी में
आदेश रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2011 से अस्थायी कार्यभार ग्रहण करने के आदेश का हवाला देकर अखोप से पतनारी सेवा दे रही सहायक अध्यापक लक्ष्मी देवी के इस तैनाती के संदर्भ में कोई आदेश जारी ही नहीं किया गया है। जबकि पिछले 11 वर्ष से वह पतनारी में ही सेवा दे रही है। जबकि उनकी तैनाती अखोप गांव में है। 2018-19 में जब पतनारी गांव के प्राथमिक स्कूल नं. 1 और दो को संविलन किया गया तो कंपोजिट प्राथमिक स्कूल पर इंद्र प्रताप सिंह को वरिष्ठता के आधार पर प्रधानाध्यापक का चार्ज मिला किंतु श्रीमती लक्ष्मी देवी ने अपनी तैनाती बताते हुए बतौर प्रधानाध्यापक अलग से उपस्थिति रजिस्टर संचालित किया जाने लगा। जिसके बाद से ही यहां तैनाती को लेकर विवाद गहराने लगा। प्रधानाध्यापक के इस विवाद के खेल में यहां पठन पाठन भी प्रभावित होने लगा था।

जांच के बाद मूल तैनाती स्कूल पर कार्यभार ग्रहण करने का आदेश जारी
मामले में उच्चस्तरीय जांच के बाद तत्कालीन बीएसए ने लक्ष्मी देवी की पतनारी स्कूल पर तैनाती को गलत पाया और उन्हें मूल तैनाती क्षेत्र में सेवा देने का आदेश जारी कर दिया गया। जिसके आधार पर सीयर एसडीआई राकेश कुमार सिंह के आदेश जारी होते ही शुक्रवार को प्रधानाध्यापक इंद्र प्रताप सिंह ने तत्काल प्रभाव से लक्ष्मी देवी को पतनारी कंपोजिट प्राथमिक स्कूल से कार्यमुक्त कर दिया।



