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वीर सपूतों की वीरगाथा जानने चरौवां शहीद स्थल पर पहुंचे स्कूली छात्र

एसडीएम-तहसीलदार ने छात्रों के उत्सुकता को सराहा

R News Manch

बलियाः आजादी के लड़ाई में बलिया जनपद के बेल्थरारोड के शहीदों की वीरगाथा जानने मंगलवार को स्कूली छात्रों का जत्था चरौवां शहीद स्मारक स्थल पर पहुंचा औेर शहीदों कोे नमन किया। सेंट जेवियर्स स्कूल और एनसीपीए के छात्रों ने गांव में शहीदी वीरगाथा को करीब से जाना। ंइस दौरान एसडीएम राजेश गुप्ता औैर तहसीलदार ओपी पांडेय ने शहीदों की गाथा जानने को लेकर छात्रों में व्याप्त उत्सुकता को सराहा और उनसे इतिहास को रुचि के साथ अध्ययन करने की अपील की।


बोले एसडीएम राजेश गुप्ताः इतिहस पढ़ने के प्रति बढ़ाएं रुचि
दैनिक जागरण के पहल पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मुख्यअतिथि बेल्थरारोड एसडीएम राजेश गुप्ता ने शहीद स्थल पर आना सौभाग्य की बात है। छात्रों में देशभक्ति के प्रति जज्बां जगाना जरुरी होता है। ऐसे में उन्हें भारतीय इतिहास को समझाना जरुरी है। शहीदों और आजादी के गाथाओं को जानना जरुरी है। इतिहास जानें बगैर छात्र यह नहीं समझ सकेंगे कि आजादी के संघर्ष में वीर सपूतों को कितनी तकलीफें हुई। एसडीएम ने विशेषकर छात्रों से अपील किया कि ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे आपके स्कूल, माता पिता, घर परिवार, जिला और देश का नाम बदनाम हो। एक छात्र पूरे देश की उम्मीद होता है। जो देश के विकास और परिवार का नाम रोशन करने के लिए विशेष कार्य करें। पढ़ाई के साथ खेलकूद को भी एसडीएम ने जरुरी बताया और कहा कि योगा करने के साथ ही बाहरी भोजन और फास्ट फूड को छात्रों को पूरी तरह से त्याग देना चाहिए।


तहसीलदार ने शहीदों को किया नमन
तहसीलदार ओपी पांडेय ने शहीदों को नमन करते हुए छात्रों के सक्रियता को सराहा। समाजसेवी शशिप्रकाश चैरसिया, शिक्षक आनंद श्रीवास्तव ने आजादी के अमृत महोत्सव के महत्व पर विशेष फोकस किया।


मारकण्डेय सिंह ने शहीदों के वीरगाथा को विस्तार से बताया
आजादी के लड़ाई में चरौवां गांव के शहीद मंगला सिंह के चाचा और शहीद स्मारक समिति अध्यक्ष मारकण्डेय सिंह ने गांव में शहीदों के वीरगाथा से छात्रों को विस्तार से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने गांव में तीन स्थानों पर मशीनगन लगाया और एक घंटे में अंग्रेजों ने साढ़े चार हजार राउंड फायरिंग किया था। अंग्रेजों ने ग्रामिणों और क्रांतिकारियों के हौसले को तोड़ने के लिए यहां क्रूरता का जबरदस्त तांडव किया। जिसे यादकर ग्रामिणों की आंखे नम हो गई।


संचालन शशिप्रकाश चैरसिया ने किया
संचालन करते हुए शशि प्रकाश चैरसिया ने छात्रों को आदर्श नागरिक और देश के प्रति निष्ठावान बनने की सीख दी। पत्रकार विजय मद्धेशिया और प्रधान देवेंद्र यादव यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। स्वतंत्रता सेनानी स्व. हरि सिंह के पुत्र विद्यानंद वर्मा, दिनेश राजभर, अविनाश सिंह, शिक्षक उदीत राज गुप्ता, आनंद श्रीवास्तव, दीपक कुमार यादव उर्फ मुन्ना, लक्की गुप्ता, महिमा सिंह, आनंद श्रीवास्तव, राजन मद्धेशिया, सुभाष यादव, अशोक यादव, परमानंद वर्मा, प्रदीप गुप्ता, अरविंद राजभर, सोनू शर्मा समेत अनेक ग्रामिण मौजूद रहे।


आदर्श हिंदू सेवा समिति का रहा प्रमुख योगदान
चरौवां शहीद स्थल पर कार्यक्रम को सफल बनाने में आदर्श हिंदू सेवा समिति के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का विशेष योगदान रहा।


इस स्कूल के छात्र हुए शामिल, छात्रों ने रखें विचार
सेंट जेवियर्स स्कूल बेल्थरारोड के विवेक प्रसाद, अंशिका जयसवाल, हमजा रफीक, निकिता जायसवाल, नेहा कुमारी प्रजापति ने भी शहीदों को नमन करते हुए चरौवां बलिदान दिवस पर अपने विचार रखे। न्यू सेंट्रल पब्लिक एकाडमी के श्वेता गुप्ता, कोमल सिंह, उत्कर्ष चैहान, सत्यान, प्रियांशु छात्र भी प्रमुख रुप से मौजूद रहे। इसके अलावा छात्र सोनम, प्रीति, प्रशंसा, ऋचा कुमारी, मुस्कान, दिव्यांजलि, शेख अब्दुल्ला, हर्षित, अंकुर, आयुष, सुमित, विभांश, शुभम राज, हर्ष राज, सिद्धार्थ कुमार अनेक छात्र छात्राएं मौजूद रहे।


यह है चरौवां के वीरों की कहानीः

मशीनगन से घेर चरौवां में हुई थी चार हजार राउंड फायरिंग, मकतुलिया मालिन के शैर्य से बौखला गए फिरंगी
अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बलिया जिले के क्रांतिकारों और वीर सपूतों ने अंग्रेजों की सत्ता छीन कर स्वराज सरकार की स्थापना कर लिया था। जिले में फिर से ब्रिटिश साम्राज्य की सत्ता स्थापित करने के लिए कैप्टन मूर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने 24 अगस्त 1942 को बेल्थरारोड तहसील के चरौवां गांव को चारों तरफ से मशीनगन से घेर लिया और अंधाधुंध गोलियां बरसाई। यहां लगातार चार हजार राउंड फायरिंग की गई थी। जिसमें गांव के श्रीखर बियार, शिवशंकर सिंह, मंगला सिंह और विरांगना मकतुलिया मालिन शहीद हो गए। गांव में अंग्रेजों ने जमकर लूटपात भी किया। अंग्रेजों के तांडव को देख गांव की वीरांगना मकतुलिया मालिन ने कैप्टन मूर के सर पर मिट्टी की हांडी दे मारी। जिससे वह लहूलुहान हो गया। बौखलाएं अंग्रेजों ने मकतुलिया को गोलियों से भून डाला और वीरांगना का शव भी साथ लेते गए। चरौवां गांव में चार शहीद के साथ ही बेल्थरारोड में अगस्त क्रांति में चंद्रदीप सिंह ग्राम आरीपुरसरयां व अतवारु राजभर ग्राम टंगुनिया भी शहीद हो गए। इसके पहले बिल्थरारोड डम्बर बाबा मेले में ही क्रांतिकारियों ने रेलवे स्टेशन पर धावा बोलने की योजना बनाई थी और क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ बिल्थरारोड का रेलवे स्टेशन और मालगोदाम को फूंक डाला था। वीर सपूतों के शौर्यगाथा आज भी यहां के फिजांओं में ताजा है। चरौवां गांव में स्थित ऐतिहासिक शहीद स्मारक उनके बलिदानी दास्तां को बयां करती है। शहीदों के रक्त से यहां का जर्रा जर्रा आज भी लाल है। जो वीर सपूतों के शहादत पर गर्व का अहसास करता है।


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