पुलिस की एकपक्षीय कार्रवाई पर भड़के ग्रामीण!
मारपीट दो तरफ से हुई, पर केस सिर्फ एक पर क्यों?”






सिकंदरपुर पुलिस की एकपक्षीय कार्रवाई पर भड़के ग्रामीण! बोले – “मारपीट दो तरफ से हुई, पर केस सिर्फ एक पर क्यों?”
बलिया। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के काजीपुर गांव में सोमवार को दो पक्षों में हुई मारपीट के बाद पुलिस की कथित एकपक्षीय कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। गांव में अब यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब भिड़ंत दोनों पक्षों में हुई थी, तो कार्रवाई सिर्फ एक पर क्यों?
जानकारी के मुताबिक, गांव के धनेश तुरहा पुत्र अदालत और सुनील तुरहा पुत्र सुरेन्द्र के बीच किसी मामूली कहासुनी को लेकर विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते दोनों ओर से लाठी-डंडे चलने लगे। बात इतनी बढ़ी कि धनेश तुरहा के घर वाले और कुछ अन्य लोग लाठी, डंडा व ईंट-पत्थर लेकर सुनील के घर पर टूट पड़े। दोनों ओर से जमकर मारपीट हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
घायलों में एक पक्ष से धनेश तुरहा, कांती देवी पत्नी गनेश तुरहा और गनेश पुत्र अदालत, जबकि दूसरे पक्ष से माया पुत्री सुरेन्द्र तुरहा, अहिल्या पत्नी सुरेन्द्र तुरहा, धर्मेन्द्र तुरहा पुत्र सुरेन्द्र, रुबी पत्नी हरेराम तुरहा और घूरा पुत्र हरेराम घायल बताए जा रहे हैं।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले गई। ग्रामीणों का आरोप है कि उसी रात पुलिस ने एक पक्ष को छोड़ दिया, जबकि दूसरे पक्ष के लोगों को थाने में बैठाए रखा। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सिर्फ एक पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया, जबकि दूसरे पक्ष की सुनवाई तक नहीं हुई।
पीड़ित पक्ष की महिला अहिल्या देवी ने आरोप लगाया कि “हम लोग सोमवार को बाजार में सब्जी बेच रहे थे, तभी हमारे बेटे सुनील का धनेश से किसी बात पर झगड़ा हो गया। जब हम घर पहुंचे तो देखा कि धनेश का पूरा परिवार और कुछ अन्य लोग लाठी-डंडा लेकर हमारे घर पर हमला कर रहे हैं। हमने किसी तरह जान बचाई, लेकिन पुलिस हमारी शिकायत दर्ज नहीं कर रही है।”
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस का यह रवैया बेहद निराशाजनक है। “जब दोनों तरफ चोटें आई हैं, तो मुकदमा दोनों पर होना चाहिए। एक पक्ष को छोड़ देना और दूसरे को फंसा देना न्याय नहीं है,” एक ग्रामीण ने कहा।



