मिशन 2027: दावेदार अनेक, अनुभव शून्य! बेल्थरारोड में सपा टिकट पर दिलचस्प जंग
बेल्थरारोड में सपा का चेहरा कौन? दावेदारों की भीड़, लेकिन जनता के बीच कौन?






मिशन 2027: दावेदार अनेक, अनुभव शून्य! बेल्थरारोड में सपा टिकट पर दिलचस्प जंग
बेल्थरारोड में सपा का चेहरा कौन? दावेदारों की भीड़, लेकिन जनता के बीच कौन?
बलिया। मिशन 2027 की आहट के साथ बेल्थरारोड सुरक्षित विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के संभावित चेहरों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। टिकट की दौड़ में शामिल लगभग हर नेता खुद को भावी विधायक मानकर चल रहा है, जबकि जनता अभी भी इस सवाल का जवाब तलाश रही है कि आखिर सपा का असली चेहरा कौन होगा?
दिलचस्प बात यह है कि टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल अधिकांश नेताओं ने आज तक विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है। यानी जनता के बीच खुद को अनुभवी बताने वाले ये सभी नेता विधानसभा राजनीति के लिहाज से अभी भी “फ्रेशर” ही हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि पार्टी अनुभव पर दांव लगाएगी या उम्मीद पर?
दावेदारों की सूची में पूर्व मंत्री घूरा राम के पुत्र संतोष राम, प्रदेश सचिव राजन कन्नौजिया, समाजवादी नेता राजेश पासवान, नगरा नगर पंचायत चेयरमैन प्रतिनिधि उमाशंकर राम और पिपरौली बड़ागांव के प्रधान सज्जन पासवान प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। इनके अलावा अशोक पासवान और दुर्गविजय नंदा जैसे नाम भी समय-समय पर राजनीतिक गलियारों में उछलते रहते हैं।
पूर्व मंत्री के पुत्र एवं सपा के प्रदेश सचिव संतोष राम के समर्थकों का आत्मविश्वास ऐसा है मानो टिकट की घोषणा सिर्फ औपचारिकता भर बाकी हो। समर्थक उन्हें भावी विधायक से आगे बढ़ाकर भावी मंत्री तक घोषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हालांकि क्षेत्र की जनता का एक वर्ग यह भी पूछ रहा है कि सुरक्षा घेरे से बाहर निकलकर आम मतदाता तक पहुंचने का सिलसिला कब शुरू होगा?
उधर समाजवादी नेता राजेश पासवान पिछले डेढ़ दशक से टिकट की कतार में खड़े हैं। हर चुनाव में उम्मीदें जागती हैं, चर्चाएं होती हैं, समीकरण बनते हैं और फिर टिकट किसी दूसरे के हिस्से चला जाता है। राजनीतिक हलकों में मजाक चलता है कि अगर टिकट मांगने की वरिष्ठता के आधार पर चयन होता तो राजेश पासवान अब तक कई बार विधायक बन चुके होते।
प्रदेश सचिव राजन कन्नौजिया की पहचान संगठन के मजबूत और जमीनी नेता के रूप में की जाती है। लेकिन उनकी राजनीति भी फिलहाल दावेदारी के लंबे इंतजार की कहानी बनकर रह गई है। कार्यकर्ता उन्हें मजबूत मानते हैं, लेकिन टिकट का रास्ता अभी भी मजबूत नहीं दिखता।
वहीं उमाशंकर राम और सज्जन पासवान जैसे नए दावेदार भी मैदान में पूरी सक्रियता के साथ नजर आ रहे हैं। दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं और समर्थक उन्हें बदलाव का चेहरा बता रहे हैं।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है कि जनता के बीच सबसे ज्यादा कौन है? राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि टिकट की दौड़ में शामिल अधिकांश नेता फिलहाल जनता से ज्यादा पार्टी के बड़े नेताओं और संगठन के प्रभावशाली चेहरों के आसपास सक्रिय दिखाई देते हैं। गांव-गांव की चौपालों से ज्यादा चर्चा लखनऊ और पार्टी कार्यालयों की परिक्रमा को लेकर हो रही है।
बेल्थरारोड की जनता विकास, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर बात करने वाले चेहरे की तलाश में है, जबकि दावेदार टिकट की गणित और राजनीतिक समीकरण साधने में व्यस्त हैं। ऐसे में 2027 का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सपा बेल्थरारोड में ऐसा चेहरा उतारेगी जो जनता की पसंद हो, या फिर ऐसा जिसे सिर्फ समर्थकों ने पहले से “माननीय” घोषित कर रखा हो।



