ईडी के रडार पर एनआरएचएम घोटाले के आरोपी पूर्व सीएमओ कन्हैया लाल
बेल्थरारोड के आवास पर ईडी ने चस्पा किया नोटिस, 30 जुलाई तक हाजिर होने की थी मोहलत

बलियाः करीब दस वर्ष पुराने प्रदेश के बहुचर्चित एनआरएचएम (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन) घोटाले में बेल्थरारोड के मूल निवासी और पूर्व सीएमओ कन्हैया लाल की मुश्किलें कम नहीं हो रही। करीब एक दशक पुराने मामले में सीबीआई के बाद अब ईडी ने उन पर शिकंजा कसना शुरु कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने एनआरएचएम घोटाले में पूर्व सीएमओ कन्हैयालाल के बेल्थरारोड वार्ड सं. सात स्थित मकान पर ईडी ने नोटिस चस्पा किया है। नोटिस में प्रवर्तन निदेशालय ने 30 जुलाई तक हाजिर होने की मोहलत दिया थी। इसके साथ ही एक जमानती वारंट की नोटिस भी चस्पा की गई है। यहां घर पर ताला लटका है। फिलहाल उनका लोकेशन चित्रकुट का मिल रहा है। जहां संभवत वे अपने बेटे सुभ्रांशु कुमार के साथ रह रहे है। बताया जा रहा है कि करीब ढाई माह पूर्व मुहल्लेवासी उन्हें इस घर में आखिरी बार देखे थे किंतु अचनाक रात में वे अपने निजी गाड़ी से यहां से निकल गए। जिसके बाद से ही यहां ताला लटका हुआ है। अब उनके आवास पर ईडी की नोटिस चस्पा होने से क्षेत्र में उनकी एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसके पूर्व 2012 में सीबीआई ने भी उन्हें एनआरएचएम घोटाले में पकड़ा था।

ईडी की नोटिस और जमानती वारंट
चस्पा किए गए नोटिस 22 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय के असिस्टेंट डायरेक्टर अंकुर जायसवाल के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। जिस पर जिला एवं सत्र न्यायाधिश/स्पेशल कोर्ट और ईडी शिकायत संख्या 653/22 दर्ज है। जबकि इसके साथ जमानती वारंट नोटिस पर इसीआईआर सं. 10/2012, परिवाद संख्या 653/22 दर्ज है। ईडी के इस जमानती वारंट की नोटिस बलिया एसपी के माध्यम से ही पुलिस द्वारा यहां चस्पा किया गया है।

जांच की आंच में फंसे कन्हैया लाल उन दिनों गोरखपुर में थे सीएमओ
एनआरएचएम घाटाले की जांच में फंसे कन्हैया लाल पिछले एक दशक में कई बार चर्चा में आ चुके है। घोटाले के समय वे गोरखपुर में सीएमओ के पद पर थे। जबकि 2012 में वे कुशीनगर के स्वास्थ्य विभाग के एडी और बाद में गोरखपुर में स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त निदेशक पद पर रह चुके है। सीबीआई ने उन्हें पहली बार 2012 में गोरखपुर में ही हिरासत में लेकर अपने साथ बेल्थरारोड पहुंची थी और इनके आवास पर छापामारी किया। सीबीआई ने उन दिनों इनके बैंक खातों को भी खंगाला अनेक दस्तावेज जब्तकर सीबीआई उन्हें बेल्थरारोड में ही छोड़कर वापस लौट गई थी।

हजारों करोड़ के एनआरएचएम घोटाले की आंच में झुलस रहे कई तत्काली सीएमओ
2011 में केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चार सदस्यीय टीम ने यूपी में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में हुए हजारों करोड़ के घोटाले की जांच शुरु किया था। 17 जिलों के तत्कालीन सीएमओ और 22 निजी फर्मो के खिलाफ चार मुकदमे भी दर्ज किए थे। इनमें बहराइच के तत्कालीन सीएमओ हरिप्रकाश, पूर्व डिप्टी सीएमओ एके श्रीवास्तव, गोंडा के पूर्व सीएमओ एसपी पाठक, गोरखपुर के पूर्व सीएमओ कन्हैयालाल ही जांच के मुख्य केंद्रबिंदु रहे है। जिनके यहां से अनेक प्रमुख दस्तावेज जब्त किए गए थे। उस समय सीबीआइ ने 22 जिलों में दवा आपूर्ति में 22 करोड़ रुपये की अनियमितता भी पकड़ी थी। इस चर्चित एनआरएचएम घोटाले में स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदस्थ तीन चिकित्सकों की हत्या हो चुकी है, जबकि एक ने खुदकुशी कर ली थी। वहीं एक चिकित्सक की सड़क हादसे में मौत हो गई है।



