भारत-पाक युद्ध के योद्धा राजमणि ने बच्चों के बीच सुनाया शौर्यगाथा
1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में खाई गोली

बलिया: भारत-पाक के बीच हुए 1965 और 1971 के युद्ध में प्रमुख भूमिका निभाने वाले बेल्थरारोड के मुहम्मदपुर गांव के मूल निवासी राजमणि ने स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों के बीच युद्ध का शौर्यगाथा सुनाया। पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री से लेकर वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी तक के सेना के प्रति अहम फैसलों की भी चर्चा की और युद्ध के दौरान तड़तड़ाती गोलियों और बमबारी के बीच एक सैनिक के विकट परिस्थिति को भी विस्तार से बताया। जिसे सुन हर छात्र और मौजूद क्षेत्रवासियों के रोंगटे खड़े हो गए। वे स्वतंत्रता दिवस पर बेल्थरारोड न्यू सेंट्रल पब्लिक एकाडमी में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।

1965 और 1971 भारत पाक युद्ध के एकलौते जिंदा सैनिक है राजमणि
उन्होंने 1965 और 1971 के अपने युद्ध के अनुभव को साझा किया। वे उक्त दोनों युद्ध में पराक्रम दिखाने वाले वर्तमान में एकलौते जिंदा सैनिक है। बताया कि 22 वर्ष की अवस्था में वे सन 1960 में भारतीय थल सेना के सिग्नल कोर में बतौर आपरेटर शामिल हुए थे। महज पांच वर्ष बाद ही 1965 के भारत पाक युद्ध में वे एक सैनिक की तरह अपना योगदान दिया। उन दिनों खेमकरन सेक्टर में वे वीर अब्दुल हामिद के साथ ही थे। जब चारों तरफ से पाक के टैंकों से घिर जाने के बाद उन्हें कमर में एक गोली लगी। जिसके बाद अब्दुल हामिद ने पाक के कई पैटन टैंक नष्ट किए।

पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने दिया जय जवान जय किसान का नारा
युद्ध से जिंदा लौटने के बाद पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने पीठ थपथपाया। अब्दुल हामिद के साथ कई सैनिकों के किसान परिवार से ही होने के कारण तत्कालीन पीएम ने जय जवान जय किसान का नारा दिया। 1971 के भारत पाक के युद्ध में भी उन्हें योगदान का मौका मिला। जिसके लिए उन्हें बाद में छ युद्ध मेडल प्रदान किया गया। इस दौरान विद्युत विभाग के एसडीओ अजय मिश्र, प्रबंधक सतीश दुबे, अमरजीत सिंह, बृजेश पांडेय, आनंद श्रीवास्तव समेत अनेक लोग मौजूद रहे। छात्रों ने रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति की।




