बलिया में योगी राज के ठाकुर नेता बने बागी
सुरेंद्र सिंह ठोंक रहे ताल, राजधारी सिंह की भी चुनाव में आने की अटकलें तेज

बलियाः यूपी में करीब डेढ़ दशक बाद सत्ता में आई भाजपा ने योगी सरकार के ठोंको नीति एवं बुलडोजर स्टाइल को अपना ब्रांड बना लिया। जिसके कायल हुए ठाकुर नेताओं के हौसले बुलंद है। भाजपा के मुख्य आधार वोट ठाकुर और वैश्य समाज का माना जाता है। वैश्य समाज तो बागी बलिया के सभी सातों सीटों पर भाजपा के साथ पूर्व की भांति भीड़ का हिस्सा बना है। जबकि बागी बलिया में योगी राज के कई ठाकुर नेता अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा के लिए बागी तेवर अपना चुके है। भाजपा द्वारा बलिया के सातों सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा होते ही असंतुष्ट ठाकुर नेताओं ने भाजपा को ही चुनौती दे डाली है और राजनीतिक मोर्चाबंदी भी तेज कर दिया। 2017 के चुनाव में भी मोदी लहर में टिकट न मिलने पर बांसडीह से भाजपा नेत्री केतकी सिंह ने निर्दल ताल ठोंका और उस सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस बार केतकी सिंह को भाजपा ने अपने सहयोगी दल निषाद पार्टी से अपना प्रत्याशी बना दिया है। 2022 के चुनाव में एक-एक सीट भाजपा के लिए महत्व रखता है। ऐसे में पार्टी से बगावत कर कई ठाकुर नेताओं ने भाजपा के रास्ते में रोड़ा खड़ा कर दिया है। बैरिया से सीटिंग विधायक सुरेंद्र सिंह का टिकट कटा तो वे निर्दल ही नामांकन करने का ऐलान कर चुके है। इधर सिकंदरपुर में भी पूर्व मंत्री राजधारी सिंह के चुनाव लड़ने की अटकलें तेज है। पड़ोसी जनपद मऊ में भी भरत सिंह के समर्थक चुनाव मैदान में उतरने का दावा कर रहे है। हालांकि भाजपा नेता भरत सिंह ने अभी निर्दल चुनाव लड़ने के फैसले से सीधे इंकार किया किंतु वे ऐसे संभावनाओं पर फिलहाल वे चुप्पी साध गए। बिल्थरारोड के सुरक्षित सीट पर तो भाजपा के बागी प्रवीण प्रकाश हाथी पर सवार हो गए। वहीं बलिया सदर में भी भाजपा से नाखुश नागेंद्र पांडेय बसपा से प्रत्याशी हो गए।







