रुसी ट्रैंक के पास से सुरक्षित निकले भारतीय छात्र
डाक्टर बनने के लिए यूक्रेन गए थे पढ़ने, हालात बिगड़ने पर सुरक्षित लौटना बन गया था सपना

बलियाः यूक्रेन में डाक्टर बनने की हसरत लिए भारतीय छात्रों के सामने 24 फरवरी की रात का खौफनाक मंजर और रुसी टैंकों की आवाज किसी के लिए भी साक्षात मौत को सामने से देखने जैसा है। घर लौटे सुरक्षित छात्रों में आज भी भय साफ झलक रहा है। वापसी के दौरान ही अधिकांश छात्रों ने रात ओडेसा से मात्र डेढ किमी की दूरी पर रुस की तरफ से एक साथ कई मिसाइलें गिरते देखा। मिसाइलों की आवास सुन कर आंखों के सामने पल पल मौत नाचने लगी थीं। इसी रात वापस लौट रहे छात्रों ने रुसी आर्मी का टैंक भी देखा था। अब जब घर पहुंचे हैं तब जाकर छात्रों और परिजनों को सुकून मिला है। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढाई कर रहे नगरा के मनीष जायसवाल ने घर पहुंचने के बाद शुक्रवार को पत्रकारों से वार्ता की। मनीष को देख कर परिवार के सभी सदस्य काफी खुश है। सभी लोग ईश्वर व भारत सरकार को धन्यवाद दे रहें हैं। मनीष ने बताया कि रुस व यूक्रेन के बीच युद्ध छिडने के बाद हम सभी के आगे पीछे कुछ भी दिखाई नही दे रहा था। 26 फरवरी को हम लोग ओडेसा छोड दिए। ओडेसा से बस द्वारा 700 किमी का सफर तय करने में 22 घंटे लगा था। 12 किमी पैदल भी चलना पडा था। यूक्रेन बार्डर पार करने में 7 से 8 घंटे का समय लगा था। इस दौरान हम सभी स्टूडेंट बर्फ में खडे रहे। प्राइवेट बस वाले ने रोमानियां की राजधानी बुखारेस्ट एयरपोर्ट तक का किराया 15 हजार रुपए लिया जबकि वास्तविक किराया 2500 रुपए था। मनीष ने बेबाक शब्दों में कहा कि भारत सरकार ने यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने में देरी कर दी है। यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था। उन्होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि रुस के राष्ट्रपति पुतिन से वार्ता कर यूक्रेन के समी, खारकीव व कीव में फंसे भारतीय छात्रों को तत्काल स्वदेश लाने की व्यवस्था करे।
यूक्रेन में एमबीबीएस की पढाई है सस्ती
मनीष ने यह भी कहा कि इंडिया की अपेक्षा यूक्रेन में एमबीबीएस की पढाई सस्ती है इसी लिए यहां के युवाओं का पलायन हो रहा है। हमारे देश में एमबीबीएस की फीस 15 से 20 लाख रुपए प्रति वर्ष है। उपर से 15 लाख रुपए रक्षा धन भी जमा करना पडता है जबकि यूक्रेन में एमबीबीएस की फीस 4 लाख रुपए सलाना है।



