
बलियाः बेल्थरारोड विधानसभा के सीटिंग विधायक धनंजय कन्नौजिया से कार्यकर्ताओं की नाराजगी के कारण पार्टी ने उनका टिकट काटकर 2022 के चुनाव में छट्ठू राम को प्रत्याशी बनाया। प्रत्याशी बनते ही जीत को लेकर छट्ठू राम का अति आत्मविश्वास और खुद को बड़ा नेता मानने के घमंड ने उन्हें हार के मुहाने तक पहुंचा दिया। पार्टी के अंदर आ रही भीतरघात की सूचना को भी पार्टी प्रत्याशी ने सिरे से खारिजकर बेसुर ताल के अंधा दौड़ लगाते रहे। बसपा में बड़ी जिम्मेदारी निभा चुके छट्ठू राम भाजपा में जीत से पहले ही स्वयं को बड़े नेता के रुप में प्रस्तुत भी करने लगे थे। उनके बाडी लैंग्वेज से झलकते घमंड और बिगड़े बोल के कारण अनेक भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी पहले से ही नाराज चल रहे थे। पार्टी के अंदर चल रहे अंतर्कलह ने भीतरघात को और तेज कर दिया। जिसकी जानकारी मिलने पर डैमेज कंट्रोल के बजाएं छट्ठू राम ने राजनीतिक नुकसान का आभास कराने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को भी किनारा करना शुरु कर दिया। अंदर ही अंदर अनेक पार्टी पदाधिकारी भी नाराज हो गए। चुनाव प्रचार के दौरान चुनावी खर्च को लेकर भी कुछ पदाधिकारियों पर सार्वजनिक रुप से उंगली उठाने के कारण कार्यकर्ताओं और आमजन में नाराजगी बढ़ती चली गई। परिणामस्वरुप बेल्थरारोड में भाजपा 2017 में मिले वोट 77504 के आंकड़ों को भी न छू सकी और 2022 के चुनाव में भाजपा महज 73481 वोट पर ही सिमट गए। इसके साथ ही यहां छट्ठू राम का विधायक बनने का सपना टूट गया। भाजपा से टिकट फाइनल होते ही छट्ठू राम और इनके समर्थकों ने बेल्थरारोड सीट पर भाजपा के खाते में कम से कम 20 हजार दलित वोट मिलने का दावा किया था। साथ ही जनपद के अन्य सीटों पर भी भाजपा के पक्ष में दलित वोट आने की उम्मीद जताई जा रही थी किंतु चुनाव परिणाम ने दलित वोटों को लकर भाजपा के सारे दावों का भ्रम तोड़ दिया।





