
बलियाः देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच किसी भी चुनाव में जनता द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए योग्य जनप्रतिनिधि चुनने का प्रावधान है किंतु समाज में जातीय बीज की जड़े गहरी होने के बाद अब विकास करने वालों को भी कड़ी राजनीतिक चुनौती मिल रही है। सिर्फ जातीय समीकरण के आधार पर विकास करने वालों के साथ जनता की बगावत निश्चय ही समाज के विकास और देश की राजनीतिक के लिए घातक है। विकास कार्य के लिए पूरे प्रदेश में चर्चित बलिया जनपद के दिग्गज नेता उमाशंकर सिंह को रसड़ा विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर मिलने के बाद विकास को अपनी पहचान बनाने वाले राजनेताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है। जहां चुनाव के अंत समय में सिर्फ जातीय समीकरण के आधार पर उमाशंकर सिंह को कड़ी टक्कर मिली और वे कम वोटों से किसी तरह जीत सके।

विकास कार्यो के लिए जाने जाते है बेल्थरारोड नगरपंचायत चेयरमैन और सीयर ब्लाक प्रमुख
बेल्थरारोड नगरपंचायत में अपने दो कार्यकाल में विकास की नई गाथा लिखने वाले नगरपंचायत चेयरमैन दिनेश गुप्ता और अपने पहले ही कार्यकाल के शुरुआती महीनों में ही अनेक बड़े विकास कार्य करने वाले सीयर ब्लाक प्रमुख आलोक सिंह की चिंता बढ़ गई है। विकास करने वालों के साथ जनता की बगावती तेवर पर दोनों ही नेता हैरान है। भाजपा में शामिल होने के बाद पूर्व विधायक गोरख पासवान भी बेल्थरारोड विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार पर चिंतित है। ऐसे में चुनावी नैया पार करने को लेकर अब नेता नए सिरे से समीक्षा करने और तैयारी के स्वरुप को बदलने को लेकर चिंतित है। ऐसे में विकास के पक्षधर नेताओं के साथ ही जनता को भी अपने चुनावी समझ को लेकर विचार करने की जरुरत है।




