“आप“ ने बदल दिया राजनीति का मापदंड
मूलभूत मुद्दा आधारित राजनीतिक को विवश हुए राजनीतिक दल


प्रस्तुतिः अमन बरनवाल
लखनऊः देश की राजनीति में “आप“ ने अनेक राजनीतिक दलों के लिए एक नजीर पेश किया है और मूलभूत मुद्दों को आधार बनाकर राजनीतिक सफलता का नया उदाहरण पेश किया है। जिसके कारण अनेक राजनीतिक दलों ने भी अब विकास और आमजन के मूलभूत मुद्दों को अपने घोषणा पत्र में जगह दिया है। यह भारतीय राजनीति के बदलते माहौल का आगाज है और इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ आम आदमी पार्टी जैसे बड़े राजनीतिक चिंतक वाली पार्टी को जाता है।
आजादी के 75 वर्ष बाद बदले राजनीति आयाम
आजादी के बाद से ही देश की एक बड़ी आबादी के समक्ष अपनी मूलभूत आवश्यकताओं (रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क) को पूर्ण करने की चुनौती रही हैं. एक तरफ जहाँ स्वतंत्रता प्राप्ति के 75 वर्षों के पश्चात देश में विकास के उच्च आयाम स्थापित किए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ आज भी एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने पर विवश है। इसके लिए सामन्य से भी नीचे जीवनयापन करने वाले एक बड़े तबके के संदर्भ में सरकारी तथा प्रशासनिक उदासीनता भी एक प्रमुख कारण है।

आमजन के मूलभूत मुद्दों पर काम करने वाली आप ने तीसरी बार दिल्ली में बनाई सरकार
विश्व का सबसे वृहद लोकतंत्र होने के नाते भारत में निर्वाचन व्यवस्था के भी कई चरण हैं। यूँ तो हर पाँच वर्ष पर देश में लोकसभा तथा राज्यों में विधानसभा के चुनाव होते हैं। राजनीतिक दल तमाम तरह के दावे और वादों की पोटली खोलते है, सरकारें बदलती है किंतु लोगों की दशा नहीं बदलती। ऐसे में यक्ष प्रश्न ये है कि आम जनता की स्थिति कितनी परिवर्तित होती है? यदि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात से भारतीय राजनीतिक परिदृश्य का मूल्याँकन किया जाए तो चुनावों में राजनीतिक दलों ने मूलभूत मुद्दों के अलावा अन्य मुद्दों को ज्यादा वरीयता दी है किंतु अभी हाल ही के कुछ वर्षों में सिर्फ दिल्ली ही नही बल्कि देश के कई राज्यों में राजनीतिक रूप से अतिसक्रिय हुई आम आदमी पार्टी ने परम्परागत राजनीति से इतर एक नई मूलभूत मुद्दों पर आधारित “राजनीति” को प्रस्तुत किया है। 2013 में पहली बार दिल्ली में सत्ता में आई आम आदमी पार्टी की सरकार ने न सिर्फ मूलभूत मुद्दों को वरीयता दिया बल्कि दिल्ली की एक बहुत बड़ी निम्न तथा मध्यम वर्गीय आबादी को बड़े स्तर पर लाभान्वित भी किया। मानक सरकारी विद्यालय, मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा, 200 यूनिट तक फ्री बिजली, तीर्थ यात्रा योजना, फरिश्ते योजना इत्यादि जनकल्याणकारी योजनाओं का नतीजा ये रहा कि लगातार तीन बार दिल्ली की जनता ने “आप“ को प्रचंड जनादेश दिया। दिल्ली की “आप“ सरकार के शिक्षा माडल ने देश के अन्य राज्यों के समक्ष एक मानक स्थापित किया।
आप की नकलकर अन्य राजनीतिक दलों ने भी बदला घोषणा पत्र का स्वरुप
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश समेत देश के पाँच राज्यों में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों ने अपने घोषणा पत्र में जब बिजली मुफ्त देने के वायदे को शामिल किया तब यह प्रश्न उठना लाजमी था कि मूलभूत मुद्दों की राजनीति करने वाली आम आदमी पार्टी ने क्या ये स्थिति राजनीतिक दलों के समक्ष उत्पन्न की है? पंजाब में आम आदमी पार्टी को प्राप्त प्रचंड जनादेश इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि जातिगत और धर्मगत राजनीति के अलावा मूलभूत मुद्दों को भी आमजन के द्वारा व्यापक तरजीह दी जा रही है और दिल्ली तथा पंजाब सरीखे राज्य इसके उदाहरण हैं।
कुल मिलाकर वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में राजनीति का स्वरूप जनकल्याणकारी होना नितांत आवश्यक है और आम आदमी पार्टी जैसे राजनीतिक दल इसे लेकर स्वयं को साबित करने में सफल हुए है।



