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योगी सरकार में बलिया सीएमओ ने पत्रकारों पर लगाया इमरजेंसी

सीएचसी पर चस्पा करवा दी पसंदीदा पत्रकारों की सूची

R News Manch

बलियाः सीएमओ के शर्तों पर स्वास्थ्य विभाग में बड़े बड़े खेल पर पर्दा डालने के लिए बलिया में विभाग ने जबरदस्त खेल खेला और विभिन्न सीएचसी पर पसंदीदा मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची चस्पा करा दिया। सीयर सीएचसी पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चुनिंदा पत्रकारों की सूची चस्पा करने और अन्य पत्रकारों को जानकारी देने से रोकने को बलिया में सीएमओ द्वारा प्रेस पर लगाया गया अघोषित इमरजेंसी बताया जा रहा है। जिससे पत्रकारों में जबरदस्त नाराजगी है। कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की मलाई काटने में सीएमओ के खेल में ग्रामीण पत्रकार रोड़ा बन गए है। जो लगातार अस्पताल के कमियों को उजागर कर व्यवस्था सुधारने के लिए खबरें प्रकाशित करते रहे है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सूची चस्पा करने का यह अजीबोगरीब वाक्या पत्रकारों के अधिकारों का सीधा हनन है। इस सूची को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे है।
बदनाम डाक्टरों को बचाने के लिए सूची चस्पा करना विभाग के लिए फजीहत
सीयर सीएचसी पर जारी कमियों की खबर को रोकने और बदनाम डाक्टरों की कारगुजारियों को उजागर होने से बचाने के लिए विभाग ने पत्रकारों की इंट्री ही बंद कर दी। वह भी बकायदा सूची चस्पा कर। लेकिन अब यह सूची ही विभाग के आलाधिकारियों के लिए फजीहत का कारण बन गया है। हालांकि इस पर अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे है।
जिला मुख्यालय के पत्रकारों की सूची ग्रामिण इलाकों में क्यूं
जिला मुख्यालय बलिया से करीब 70 किलोमीटर दूर सीयर सीएचसी पर चस्पा किए गए मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में कुल 25 नाम है। इनमें अधिकांश जिला मुख्यालय के जिलास्तरीय रिपोर्टर और पत्रकार है। अब इनके नामों की सूची सुदूर अस्पतालों में चस्प करने के पीछे विभाग की मंशा पर सीधे सवाल उठने लगा है। जबकि जिला मुख्यालय पर सूचना विभाग के दफ्तर में जनपद भर के मान्यता और गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची मौजूद है। इसमें तहसीलवार ग्रामीण पत्रकार भी शामिल है।


हट जायेगी सूचीः सीएमओ
बलिया सीएमओ डा. जयंत कुमार ने पत्रकारों की सूची चस्पा करने के प्रकरण में पैर पीछे खींचते हुए कहा कि सूची हटाने का निर्देश दे दिया गया है।
खबरों से बौखलाता रहा है विभाग
ग्रामीण क्षेत्र में विभागीय कारस्तानी की खबरों का इनपुट ग्रामीण पत्रकार ही जिला मुख्यालय और संबंधित समाचार पत्र या चैनल के मुख्यालय तक पहुंचाते रहे है। इसकी बकायदा सूची जिला सूचना विभाग में मौजूद भी रहती है। लेकिन ग्रामीण पत्रकारों की सही रिपोर्टिंग से अक्सर विभागों मे ंबौखालाट होता रहा है। स्वास्थ्य विभाग से पूर्व शिक्षा विभाग में भी पहले खलबली मच चुकी है। बेल्थरारोड में भी लगातार गैर निबंधित अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड, पैथोलाॅजी और अनाधिकृत दवा दुकानदारों के खेल को उजागर करता रहा है। सीयर सीएचसी में भी एक अनाधिकृत अस्पताल समेत अनेक अवैध पैथोलाॅजी के संचालन के पीछे अस्पताल के ही नोडल और विभागीय अधिकारियों के के सरपरस्ती का आरोप लगता रहा है। इसके जांच और कार्रवाई की मांग भी होती रही है।


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