ओमप्रकाश राजभर का राजनीतिक खेलः भाजपा से ली सुरक्षा और मायावती राज को बता रहे बेहतर
सपा लेटर के जवाब में सुभासपा ने भी भेजा पत्र

यूपीः देश के राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी द्रोपदी मुर्मू के साथ खड़े रहने को लेकर अनेक विपक्षी दलों में खटास बढ़ गई है। सपा गठबंधन के प्रमुख साथी रहे सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को भाजपा ने वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की और इसके लिए सुभासपा अध्यक्ष ने यूपी सरकार को धन्यवाद ज्ञापित किया तो सपा गठबंधन की कलई पूरी तरह से खुल गई। सपा ने पत्र जारी कर सुभासपा को गठबंधन धर्म से मुक्त होने का ऐलान कर दिया। जिसके बाद सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बसपा और मायावती राज को बेहतर बताते हुए मिडिया के सामने सपा के कमजोर राजनीतिक क्षमता की कलई खोल दी है।

सपा के पत्र के जवाब में सुभासपा का सामने आया लेटर
शनिवार को सपा की तरफ से एक पत्र जारी कर गठबंधन से स्वतंत्र होने संबंधित एक पत्र सुभासपा अध्यक्ष के नाम जारी किया गया तो सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने भी सपा को एक पत्र भेजा और राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी को समर्थन देने के कारण का जिक्र किया है। साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि सुभासपा का गठबंधन किससे होगा, यह सुभासपा और उनके पदाधिकारी तय करेंगे।

विधानसभा चुनाव में सपा ने नहीं साधा जातीय समीकरण और लोकसभा के उपचुनाव में नहीं की सभा
सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने यूपी में विधानसभा में मिली सपा की हार के लिए पार्टी के निर्णय और अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराया है। कहा कि विधानसभा चुनाव में सीटों के हिसाब से जातीय समीकरण तक नहीं साधा गया। दलित, आदिवासी, पिछड़ा बहुत सीटों पर गलत प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे गए। जिसके कारण अधिकांश सीटों पर सपा को नुकसान हुआ। पूर्वांचल में उनके कारण सपा की नाक बच सकी। आजमगए़ और रामपुर लोकसभा के उपचुनाव में भी वे अपनी सीट बचाने के लिए सभा तक नहीं करने पहुंचे।



