डाकघर बना ग्राहकों की मुसीबतों का अड्डा
एक महीने से राउटर जला पड़ा, उपभोक्ता हलकान!





बांसडीह डाकघर बना ग्राहकों की मुसीबतों का अड्डा
एक महीने से राउटर जला पड़ा, उपभोक्ता हलकान!
बलिया: सरकारी दावों की पोल खोलती ये हकीकत है जनपद बलिया के बांसडीह उप डाकघर की, जहां एक महीने से राउटर जलकर ठप पड़ा है और पूरा लेन-देन सिस्टम घुटनों के बल गिर गया है। डाकघर में कदम रखते ही न तो नेटवर्क मिलता है और न ही पैसा। मिलती है तो सिर्फ मायूसी और अफसरों की बेरुखी भरी बातें!
17 जून 2025 को राउटर जल गया, लेकिन आज तक नया राउटर नहीं लग सका। इस तकनीकी ब्रह्मास्त्र के अभाव में सैकड़ों उपभोक्ता रोज लाइन में खड़े होकर खाली हाथ लौट जाते हैं। किसी के घर में बीमार माँ-बाप हैं, किसी को बच्चों की फीस जमा करनी है, तो कोई इलाज के लिए पैसों का मोहताज है। मगर डाकघर का हाल पूछिए मत। यहां तो अफसर कहते हैं, “राउटर आ जाए तो काम होगा, तब तक इंतजार कीजिए!”
पोस्ट ऑफिस है या परेशानी हाउस?
अब तो ग्राहक खुलकर बोल रहे हैं कि ये डाकघर नहीं, “धैर्य परीक्षा केंद्र” बन गया है। रोज तकरार, तू-तू मैं-मैं, और कभी-कभी तो झगड़े की नौबत तक आ जाती है। उपडाकपाल संजय सिंह का कहना है कि राउटर जलने की सूचना बार-बार ऊपर तक दी गई है, मगर ऊपर वाले शायद कान में रुई डालकर बैठे हैं!
ग्राहक आशीष सिंह, विनोद सिंह, अश्वनी सिंह, और रविशंकर पांडेय जैसे कई लोगों ने आरोप लगाया है कि यहां तो रुकावटें आम बात हो गई हैं! कभी नेटवर्क नहीं, कभी कर्मचारी नहीं, और अब राउटर भी नहीं!
अब सवाल उठता है कि क्या ये वही डाकघर है जिसे बैंकों से भी बेहतर सुविधाएं देने का दावा किया जाता है? या ये वो जगह है जहां जनता का धैर्य हर दिन जलता है, बिलकुल उसी राउटर की तरह!
जनता का सवाल साफ है कि कब तक ऐसे ही भागते रहेंगे हम? कब मिलेगा पैसा? और क्या कभी सुधरेंगे डाकघर के हालात?



