फ्रांस से आए प्रोफेसर रामेश्वर दुबे ने बच्चों को दिया ज्ञान का मंत्र
पढ़ाई करो नौकरी देने के लिए, लेने के लिए नहीं!




फ्रांस से आए प्रोफेसर रामेश्वर दुबे ने बेल्थरारोड में बच्चों को दिया ज्ञान का मंत्र
पढ़ाई करो नौकरी देने के लिए, लेने के लिए नहीं!
बलिया: बेल्थरारोड में बुधवार को सेंट जेवियर्स स्कूल का माहौल कुछ खास था। बच्चों की भीड़ थी, लेकिन इस बार किताबों के लिए नहीं, ज्ञान की असली चिंगारी सुनने के लिए। मौका था बेहतर शिक्षा और उसके परिणाम पर आयोजित सेमिनार का, जहां फ्रांस से आए मूल भारतीय और इंटरनेशनल लेवल के शिक्षा जगत के दिग्गज प्रोफेसर रामेश्वर दुबे, खुद बच्चों को दिशा दिखाने पहुंचे।
जैसे ही मंच पर प्रोफेसर दुबे का स्वागत हुआ, स्टूडेंट्स में उत्साह की लहर दौड़ गई। स्कूल डायरेक्टर डॉ. जे.आर. मिश्र और प्रिंसिपल श्रीमती शीला मिश्रा ने प्रो. रामेश्वर दुबे को बुके और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
जिसके बाद शुरू हुआ बच्चों के सवालों की झड़ी और प्रोफेसर के जवाबो का सिलसिला। प्रोफेसर ने साफ साफ कहा कि पढ़ाई का मतलब सिर्फ IAS, IPS या डॉक्टर बनना नहीं है। असली शिक्षा वो है जो आपको नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाती है!”
इतना ही नहीं, उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी और राजनीति की गर्म बहसों से बचने की सलाह भी दी। बोले कि भारतीय टीवी डिबेट्स नहीं, UK की संसदीय बहसें देखो, दिमाग खुलेगा!”
हालांकि उन्होंने भारतीय शिक्षकों की स्थिति पर चिंता भी जताई। कहा कि “जो खुद ज्ञान का स्रोत हैं, वो आज सम्मान और संसाधनों के लिए जूझ रहे हैं।” गांव में एक शिक्षक से ज्यादा एक सिपाही का रुतबा होता है। जिसके लिए सामाजिक विचारधारा दोषी है।
छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी यह सेमिनार यादगार बन गया। मंच पर वाइस प्रिंसिपल तनवीर फातमा, शिक्षक बबलू जी, जेके गोयल समेत तमाम गणमान्य मौजूद रहे।
जानिए कौन हैं प्रोफेसर रामेश्वर दुबे?
पूर्णकालिक प्राध्यापक – मोंटपेलियर बिजनेस स्कूल, फ्रांस
अतिथि प्राध्यापक – लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी, यूके
पूर्व सहायक प्राध्यापक – IIM जम्मू, भारत
शैक्षणिक सफर – ब्राज़ील, चीन, यूके, स्वीडन, फ्रांस, भारत






