बलिया में शिक्षा विभाग का गड़बड़झालाः एडेड स्कूल में चपरासी से हेडमास्टर तक एक ही परिवार के
सास चपरासी और बहू बनी है प्रधानाध्यापिका, छात्र शून्य

प्रस्तुतिः अमरनाथ गुप्ता
बलियाः राजनीति में परिवारवाद की गहरी होती पैठ अब स्कूलों में भी देखने को मिलने लगा है। जो स्कूलों में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का कारण बना हुआ है। जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लाजमी हैं। मामला बलिया जनपद के आखिरी छोर पर स्थित श्रीभगवान बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुरुषोत्तम नगर अवराईकला नगरा का हैं। जिस विद्यालय में स्टाफ की नियुक्ति में घोर अनियमितता की संभावना व्यक्त की गई हैं। अवराईकला निवासी रमावती देवी ने बलिया डीएम, बीएसए ओर यूपी सरकार को ट्वीट कर पूरे मामले के जांच की मांग की हैं। आरोप है कि इस विघालय में सभी स्टाफ एक ही परिवार के है। इसमें अंजनी देवी पत्नी स्व. सीताराम चपरासी और पतोह रेनू गुप्ता पत्नी प्रमोद गुप्ता प्र.अ है। रंजना गुप्ता पत्नी मनोज गुप्ता सअ, प्रदीप कुमार गुप्ता पुत्र स्व. श्रीभगवान गुप्ता लिपिक, रीना गुप्ता पत्नी प्रदीप कुमार गुप्ता सअ के पद पर नियुक्त हैं। इसमें चपरासी अंजनी देवी, रीना गुप्ता व रेनू गुप्ता की सास हैं। वही इसके प्रबंधक ओमप्रकाश गुप्ता निवसी अखोप की समधन हैं। जबकि रंजना व प्रदीप की चाची हैं। चपरासी अंजनी देवी श्रीसुखदेव पुरूषोत्तम उमा अवराईकला की प्रबंधक भी हैं। ये सभी लोग एक ही परिवार के हैं। विद्यालय के बगल में ही इनका घर है। ये लोग घर पर ही रहते है जब किसी अधिकारी के आने की सूचना मिलती है तो विद्यालय में पहुचते हैं। यह विद्यालय समभवतः वर्ष 2006 में ही एडेड हुआ। सभी स्टाफ की शैक्षिक योग्यता व जांति प्रमाण पत्र भी संदेह बताया जाता हैं। एक ही परिवार के सभी लोगों की सभी पदों पर नियुक्ति से प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है। वर्तमान में इस विद्यालय में एक भी बच्चें पढ़ने नहीं आते हैं। यहां पर सभी सरकार के नियम बेकार साबित हो रहे हैं। प्रत्येक माह इस विद्यालय पर सरकार का लाखों रूपया कर्मचारियों के वेतन के रूप में खर्च होता है। फिर भी इस विद्यालय पर शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। यह केवल नाम मात्र का ही विद्यालय रह गया। इससे पूर्व भी शिकायत पर इस विद्यालय की जांच हुई है जिसमें केवल वेतन रोक कर अधिकारियों द्वारा खानापूर्ति की जाती रहीं है और बाद में सेटिंग के जरिये वेतन बहाल कर दिया जाता है। इस स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या भी शून्य है।



