पट्टा घोटाले का उजागर हुआ 12 साल पुराना खेल





हल्दीरामपुर में पट्टा घोटाले का उजागर हुआ 12 साल पुराना खेल: जिलाधिकारी न्यायालय ने रद्द किए 251 आवासीय पट्टा, सनसनी
“कुछ जिंदा नहीं, फिर भी पट्टाधारी बन बैठे!”
बलिया: जनपद बलिया के सीयर ब्लॉक के हल्दीरामपुर गांव में 12 साल पहले बांटे गए 238 कृषि पट्टे के रद्द होने के बाद 251 आवासीय पट्टा भी रद्द कर दिए गए हैं। वाद की सुनवाई के दौरान बलिया जिलाधिकारी न्यायालय ने वाद की सुनवाई के दौरान जांच रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया है। 2013 में बांटे गए इन पट्टों के खिलाफ राजेश कुमार ने 2015 में DM कोर्ट में वाद दाखिल किया था। आरोप है कि बिना किसी बैठक और जांच के ही तत्कालीन प्रधान और अधिकारियों की मिलीभगत से अपात्रों को मनमाने तरीके से आवास आवंटन कर दिया गया था। जिसकी जांच में पूरी तरह से अनियमितता मिली है। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी पट्टे रद्द कर दिए। इसकी जानकारी मिलते ही वर्तमान प्रधान अनंतदेव सिंह टाइगर ने इस न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अब नए सिरे से आवंटन की प्रक्रिया होगी। हैरानी की बात ये है कि कई पट्टाधारी अब जीवित ही नहीं हैं, फिर भी उनके नाम पट्टे बने रहे। आदेश के अनुसार अब दो महीने में नए पात्रों का चयन होगा। बताया जा रहा है कि उस वक्त न जांच हुई, न सत्यापन, बस नाम भर के खानापूर्ति कर डाली गई और वो भी अपात्रों के नाम। कुछ नाम तो ऐसे हैं जो वर्षों पहले से मृतक है। ओमप्रकाश, हरिश्चंद्र, नथुनी, मोहन समेत कई पट्टाधारक मृतक है। यही हाल कृषि पट्टा का भी था। जिसे जिलाधिकारी न्यायालय से विगत 13 जुलाई को ही निरस्त किया गया था। कृषि के बाद आवासीय पट्टा निरस्त करने के आदेश के बाद से ही गांव में माहौल गरम है।



