टिकट बंटवारे में विसंगति से पूर्वांचल के अधिकांश सीटों पर बीजेपी हुई कमजोर
मधुबन से भरत भैया भी हुए बागी, निर्दल करेंगे नामांकन

मऊः मऊनाथ भंजन जनपद के मधुबन विधानसभा सीट से टिकट न मिलने से नाराज दिग्गज भाजपा नेता भरत भैया ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे अब निर्दल ही मधुबन विधानसभा की जनता के बीच जायेंगे और क्षेत्र के विकास के लिए जनमत जुटाने के लिए ताकत झोंकेंगे। भरत भैया 16 या 17 फरवरी को नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। मऊ जनपद में सातवें चरण के तहत 7 मार्च को चुनाव होना है। यहां भाजपा ने गर्वनर फागू चैहान के पुत्र रामविलास चैहान को चुनाव मैदान उतारा है। जबकि यहां पिछले करीब 12 वर्ष से भरत भैया जनता के बीच भाजपा का झंडा लेकर लगातार लगे रहे और उन्हें 2022 के चुनाव में टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी किंतु पार्टी ने अंत समय में यहां पर गर्वनर पुत्र को पैराशूट कंडिडेट के रुप में चुनाव मैदान में उतार दिया है। जिससे यहां के क्षेत्रीय भाजपाईयों में भी खासा नाराजगी है।

टिकट बंटवारे में विसंगती के कारण पूर्वांचल में पीछे रहेगी भाजपा
भरत भैया ने कहा कि भाजपा में निश्चय ही कोई ऐसा विभिषण है जो भाजपा का अहित करने में लगा है। पूर्वांचल के अधिकांश जीतने वाले सीटों पर टिकट बंटवारे में ऐसी विसंगति की गई है कि भाजपा अब वहां पीछे रहेगी। शत फीसदी जीतने वाले सीट पर भी इस बार भाजपा का हारना तय है। मधुबन सीट पर भी भाजपा का हार तय बताते हुए कहा कि वे निर्दल ही भाजपा पर भारी रहेंगे। जनता उनके साथ है।

वंशवाद, दलबदलू नीति को बढ़ावा देने के कारण दिया इस्तीफा
भाजपा नेता रहे भरत भैया ने कहा कि पार्टी ने वंशवाद, भ्रष्टाचार और दलबदलू नीति को बढावा दिया है। गर्वनर पुत्र को सिर्फ इसलिए टिकट दिया गया कि वह बड़े ओहदे पर तैनात नेता का बेटा है। जो भ्रष्टाचार में लिप्त है। कहा कि पार्टी ने इस बार दलबदलुओं को तवज्जों दिया है। पार्टी के लिए सबकुछ न्योछावर करने वालों को पार्टी ने धोखा दिया। उन्होंने अपना टिकट कटने को अव्यवहारिक, अप्रासंगिक और अराजनीतिक बताया। उन्होंने कहा कि गर्वनर पुत्र को टिकट ही देना था तो उनके पिता के सीट पर मौका देना चाहिए। यह प्रयोग मधुबन में कतई नहीं होना चाहिए। वे पिछले 25 साल से भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे थे और 12 वर्ष से मधुबन में भाजपा के लिए सींचते रहे।

2017 में ही लड़ गए होते चुनाव तो आज बीजेपी स्वयं देती टिकट
भाजपा से टिकट न मिलने से दुखी भरत भैया ने 25 वर्ष बाद दुखी मन से भाजपा से इस्तिफा देने के बाद कहा कि 2017 में ही वे अगर भाजपा से अलग अपनी राह तय किए होते तो आज पार्टी स्वयं बुलाकर उन्हें प्रत्याशी बना देती। उन्होंने 2017 की बागी केतकी सिंह, विजयलक्ष्मी और सभाकुंवर का उदाहरण देते हुए कहा कि वे 2017 में पार्टी के निष्ठावार कार्यकर्ता के रुप में भविष्य में साथ देने की उम्मीद से पीछे हट गए किंतु निष्ठावान कार्यकर्ताओं को भाजपा ने धोखा दिया है। कहा कि 2017 में उन्हें भाजपा के बड़े नेता सदन में भेजने का भरोसा दिला रहे थे किंतु उन्होंने उसी समय कह दिया था कि वे राजनीति में बैकडोर से आगे नहीं जाने वाले। वे तो जनता के बीच चुनकर सदन में पहुंचेंगे किंतु विनाश काले विपरित बुद्धि की शिकार हुई भाजपा ने तो बड़े नेता के पुत्र को एडजस्ट करने के चक्कर में उनका ही टिकट काट दिया।



