“छोटे रास्तों से बड़े दिलों तक: गोरख पासवान”
यह तस्वीर है उस नेता की, जो आज भी लोगों के दिलों में राज करता है!



“छोटे रास्तों से बड़े दिलों तक: यह तस्वीर है उस नेता की, जो आज भी लोगों के दिलों में राज करता है!”
बलिया: यह तस्वीर कुछ वर्ष पुरानी है लेकिन आज फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, और इसके साथ ही एक नाम एक बार फिर चर्चा में है गोरख पासवान।
सड़क पर दो से तीन फिट तक बारिश का पानी, कीचड़ से सना रास्ता, और बिना छतरी के अपने क्षेत्रवासियों का हाल-चाल लेते हुए यह शख्स कोई और नहीं बल्कि बलिया जिले के लोकप्रिय पूर्व विधायक गोरख पासवान ही हैं।
तस्वीर बेशक पुरानी है, लेकिन भावनाएं आज भी ताज़ा हैं।
उस वक़्त वे समाजवादी पार्टी से विधायक थे, लेकिन आज भारतीय जनता पार्टी में एक सशक्त चेहरे के रूप में उभर चुके हैं। उनकी सादगी, संघर्ष और सेवा की यह तस्वीर बताती है कि असली नेता वही होता है जो चुनाव के मौसम में नहीं, हर मौसम में जनता के साथ खड़ा नजर आए।
ईमानदार उसूलों वाला नेता – राजनीति में दुर्लभ चेहरा!
गोरख पासवान उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जिनका नाम सुनते ही लोगों की जुबान पर अपनेपन की मिठास घुल जाती है। वे केवल एक राजनेता नहीं, एक संवेदनशील जनसेवक हैं। चाहे चुनाव हो या आपदा—गांव-गांव, गली-गली, खेत-खलिहान तक उनकी उपस्थिति लोगों को यह यकीन दिलाती है कि कोई तो है जो सत्ता में नहीं होते हुए भी हर पीड़ा को अपनी पीड़ा मानता है।
संघर्ष और साजिशों के बीच अडिग विश्वास
2012 से 2017 तक बलिया जनपद के बेल्थरारोड की जनता ने उन्हें अपना विधायक चुना। मगर सियासत की गलियों में ईमानदारी और सिद्धांत अक्सर भारी पड़ते हैं। उन्हें भी बदले राजनीतिक समीकरणों और अवसरवादी गठजोड़ों का खामियाजा उठाना पड़ा। लेकिन गोरख पासवान उन नेताओं में से हैं जो हालातों से नहीं, उसूलों से समझौता करते हैं।
बलिया के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर पासवान के पिता के रूप में भी उनकी राजनीतिक विरासत मजबूत है। और अब जब 2027 का विधानसभा चुनाव पास आ रहा है, तो क्षेत्र की जनता उन्हें सबसे योग्य, सर्वमान्य और स्वाभाविक दावेदार के रूप में देख रही है।
हर दिल अज़ीज़ – अबकी बार फिर गोरख पासवान!
भाजपा में शामिल होने के बाद उनका जनसंपर्क और अधिक सक्रिय हुआ है। गांवों में हर दुःख-सुख की घड़ी में उनका साथ और सरल व्यवहार लोगों के दिलों में फिर से उम्मीद की लौ जला रहा है। वे नारे नहीं, निष्ठा की राजनीति करते हैं।
बलिया में बेल्थरारोड की सड़कों, गलियों, और खेतों में एक बार फिर वो पुराना जज़्बा लौट आया है—”अबकी बार, गोरख पासवान सरकार!”






