राजनीतिः भाग्य उदय की आस में भाजपा के सुरमा
लक्ष्य मिशन 2027 और जनप्रिय बनने की ललक में सभी को खुश करने का नकली प्रयास



राजनीतिः भाग्य उदय की आस में भाजपा के सूरमा
लक्ष्य मिशन 2027 और जनप्रिय बनने की ललक में सभी को खुश करने का नकली प्रयास
बलियाः राजनीति और बागीपन के लिए चर्चित पूर्वांचाल के बलिया जनपद में सुरक्षित सीट पर भाजपा के सूरमा अपने भाग्य उदय की उम्मीद में हर खेमे में हाथ पांव मार रहे है। कहते है जो सबका बनता है, वह वास्तव में किसी का नहीं होता… और उससे बड़ा स्वार्थी भी कोई नहीं होता। बावजूद बेल्थरारोड की फक्कड़ राजनीतिक माहौल में सबसे बड़े राजनीतिक पार्टी में अगुवाई की आस रखने वाले सबका खास बनने की जुगत में लगे है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर आरएसएस और आमजन तक में अपनी पैठ बनाने और उपस्थिति दर्ज कराने का कोई बहाना नहीं छोड़ना चाहते।
मिशन 2027 के भाजपाई सूरमा...
भाजपा से विधायक रह चुके और 2022 में मौका न मिलने के कारण अब विधानसभा चुनाव 2027 को अपने राजनीतिक कैरियर का जैकपाॅट मानने वाले एक दिग्गज नेता जी को लेकर चर्चा है कि उनके व्यवहार में काफी बदलाव आया है। अब वा सबको गले लगाते है और मुस्कुरा कर सभी का स्वागत करते है लेकिन उनके इस बदलाव के पीछे की असली मंशा पब्लिक और कार्यकर्ता दोनों समझ रहे है। जिसके कारण कार्यकर्ताओं में उनके प्रति इमानदार भाव नहीं झलक रहा है। इसका एहसास भी उन्हें बखुबी है लेकिन राजनीतिक मजबूरी में चुप्पी साधने में ही उनकी भलाई है। पिछले दिनों तो एक कार्यक्रम में मंच पर बैठने को लेकर सार्वजनिक रुप से नेता जी की खूब बेइज्जती हुई। लेकिन मौके की नजाकत को देखकर वे खून का घुंट पीकर रह गए। संभव है कि दिन बहुरते ही उन्हें अपने इस अपमान का बदला लेने को जरुर सुझेगा। वैसे भी लोगों को टार्गेट करके चलने के लिए ये पहले से ही बदनाम है।
बहन जी की पार्टी में अपने रुतबा को कम होते ही भाजपा के कमल को थामने वाले एक अन्य नेता जी को तो पार्टी ने 2022 में बड़ा मौका दिया लेकिन वे अपने करनी से चूक गए और अब तक वे अपनी गलती का सही वजह नहीं ढूंढ पाएं। जिसके कारण वे जब तब पुराने रौ में नजर आते रहते है। अधिकारियों के बीच उनकी अलग छवि है। कार्यकर्ता भी उनके भौकाल का राज जानते है लेकिन मौका मिलते ही किसी की हेकड़ी निकालने का दम दिखाते रहते है। फिलहाल वे उनके निजी कारणों से मुख्य राजनीति में उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बना हुआ है।
साइकिल के भरोसे पहली बार विधायक बनने वाले नेता जी का समय फिलहाल खराब चल रहा है। कभी वे बागी जनपद के फस्र्ट पर्सन मेकर थे लेकिन 2022 में पार्टी ने उन्हें ऐसा धोखा दिया कि वे अब कमल से बड़ी उम्मीद लगाएं बैठे है। अपनी पूरी ताकत भी झोंक रहे है। आमजनता में इनकी छवि अन्य नेताओं से थोड़ी अलग है। हर जगह साफ्ट प्रजेंटेशन की मिसाल कायम कर चुके है। फिलहाल अपनी विवशता और विपरित परिस्थितियों को बखुबी समझ रहे है बावजूद नेट गोल की प्रतिक्षा में हर तिकड़म आजमाने की जुगत में लगे है।
एक अन्य नेता जी, खाटी भाजपाई। उम्र के करीब 7 दशक बीतने के बाद भी लंबी उड़ान की तैयारी में। पार्टी उन्हें अनुसूचित जाति जनजाति आयोग सदस्य जैसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दे चुकी है लेकिन वे किसी तरह अपने गृह क्षेत्र से माननीय बनने की आस में लखनऊ से दिल्ली तक की दूरी को लगातार नाप रहे है।
इसके अलावा अनेक नेता जी भी मिशन 2027 फतह करने का दंभ दिखा रहे है लेकिन पार्टी इस बार किस पर दांव लगाती है यह तो समय ही बतायेगा लेकिन फिलहाल माननीय बनने की आस में पार्टी के अंदर ही सुरक्षित सीट की अगुआई की होड़ लगी है।


