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पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर के घर का मार्ग सरयू में डूबा, नाव ही बना साधन

बेल्थरारोड के आबादी में घुसा सरयू, कई रास्ते भी डूबे

R News Manch

बलिया: जनपद बलिया के बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र में सरयू के जलस्तर में रिकार्ड बढ़ोतरी जारी है। अक्टूबर माह में हुए भारी बारिश से राप्ति नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी को ही सरयू में बढ़ाव का मुख्य कारण माना जा रहा है। जिसके कारण तटवर्ती इलाकों के कई गांव में आबादी तक सरयू का पानी घुस गया है और दर्जनों रास्ते जलमग्न हो गए है। हाहानाला के पास टंगुनिया निवासी घोसी के पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर का घर भी सरयू के बाढ़ में पूरी तरह से घिर गया है। पूर्व सांसद के घर जाने वाला मुख्य मार्ग नदी में डूब गया है और घर जााने का नाव ही एकमात्र साधन रह गया है। पूर्व सांसद की पत्नी मेवाती देवी और छोटे पुत्र रजनीश राजभर समेत अनेक परिजन अभी भी बाढ़ में घिरे हुए है। जबकि पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर और ज्येष्ठ पुत्र देवानंद राजभर वर्तमान में लखनऊ है। पूर्व सांसद के आवास के बगल में ही करीब 300 की आबादी वाला निषाद बस्ती पूरी तरह से पानी से घिर गया है।

आठ सौ की आबादी सरयू से  घिरी

सरयू से करीब आठ सौ की आबादी यहां घिरी हुई है। टंगुनिया निषाद बस्ती निवासी रामाशीष निषाद ने स्थानीय प्रशासन से बाढ़ग्रस्त इलाकों को बचाने और बेसिक सुविधा मुहैया कराने की मांग किया है। बताया कि अब तक यहां पर्याप्त नाव तक नहीं लगाया गया है। रामाशीष निषाद ने प्रशासन से आबादी के हिसाब से नाव और राहत पैकेट उपलब्ध कराने की मांग किया है। वहीं मुजौना गांव में नवनिर्मित फार्म हाउस, बाबा का आश्रम और बिंद टोला पूरी तरह से नदी के पानी से घिर गया है। यहां जाने वाले मार्ग भी डूब गए है। गुलौरा गांव में भी साहनी और यादव परिवार का करीब दस घर भी नदी के बाढ़ में घिर गया है। इन क्षेत्रों में सैकड़ों मवेशियों के लिए चारा के भी लाले पड़ गए है।


एसडीएम ने किया निरीक्षण, दिए निर्देश
एसडीएम दीपशिखा सिंह ने गुरुवार को बाढ़ ग्रस्त इलाकों का निरीक्षण किया और लेखपाल को टंगुनिया, गुलौरा इलाकों में पर्याप्त नाव लगाने के निर्देश दिए। बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से आने जाने के लिए आवागमन हेतु वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पर्याप्त नाव की व्यवस्था की जायेगी।
प्रधान ने की सात नाव की मांग
टंगुनिया प्रधान महेश यादव ने कहा कि एसडीएम ने निरीक्षण के बाद महज एक नाव की व्यवस्था की है। जो अपर्याप्त है। करीब आठ सौ की आबादी और सैकड़ों मवेशियों के चारा की व्यवस्था के लिए कम से कम सात नावव की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रधान ने प्रशासन के बाढ़पीड़ितों के राहत में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।


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